INTERVIEW: सिविल परीक्षा में शुभम गुप्ता को मिला छठा स्थान, जानें शुभम की सफलता की कहानी

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जिंदगी में किसी भी चीज को हासिल करना आसान नहीं होता। लेकिन अगर आपके अंदर किसी चीज़ को पाने की चाहा हो, कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो किसी भी चीज को पाना मुश्किल नहीं होता। वो कहते हैं ना कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। बस आपके अंदर किसी चीज़ को पाने का जनून और ललक होनी चाहिए। इसके अलावा असफलता से भी कभी नर्वस नहीं होना चाहिए क्योंकि हार कर जीतने वाले को ही बाजीगर कहते हैं। आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही छात्र की जो कामयाबी के पीछे तब तक भागता रहा जब तक की कामयाबी ने उनके कदम नहीं चूम लिए। जी हां, हम बात कर रहे हैं सिविल परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त करने वाले शुभम गुप्ता की। आज हम आपको बताएंगे शुभम का एक आम छात्र से आईएएस बनने तक का सफर।

शुभम गुप्ता ने बताया कि ‘जब मैं पांचवी क्लास में था तो मेरे पिता जी ने मुझसे कहा था कि मैं चाहता हूं कि मेरा बेटा कलेक्टर बने, तो उसी दिन से मैंने सोच लिया था कि मैं इस परीक्षा की तैयारी करुंगा और आईएएस बनूंगा। इसकी तैयारी मैंने साल 2015 में शुरू की थी और अब 2019 में मुझे इसमें सफलता मिली है। साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि जो मैं अपने जीवन में करना चाहता हूं उसके बेहद करीब हूं। खासकर जो देश, समाज व लोगों के लिए करना चाहता हूं वह अब मैं कर सकूंगा।

शुभम ने अपने इस चार साल के सफर के बारे में बताते हुए कहा कि शुरुआत के दो साल तो मैंने कोचिंग ली। मैं कोचिंग का नाम नहीं लेना चाहूंगा, फिर मेरा दूसरे प्रयास में इंडियन आडिट और एकाउंट सर्विसेस में चयन हुआ और शिमला में मेरी ट्रेनिंग शुरु हुई। लेकिन ट्रेनिंग के दौरान मुझे समय कम मिलता था। जब मैं साक्षात्कार की तैयारी के लिए किसी ने मुझे सिद्धार्थ सर के बारे में बताया और सिद्धार्थ सर के माध्यम से ही मैं इनसेंबल तक पहुंचा। मैंने सिद्धार्थ सर से अपनी कुछ साक्षात्कार संबंधी समस्याओं को साझा किया। उन्होंने मेरी समस्याओं का समाधान किया। जिससे मेरे अंदर का आत्मविश्वास और मजबूत हो गया। जो मेरे साक्षात्कार और सफलता में बहुत ही मददगार साबित हुआ।

शुभम गुप्ता ने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में आनर्स किया है। उसके बाद कुछ समय के लिए दिल्ली स्कूल आफ इकोनोमिक्स में मास्टर्स के लिए ज्वाइन किया था। लेकिन दूसरे प्रयास में उनका सेलेक्सन हो गया था और जब दूसरे प्रयास में इंडियन आडिट एवं एकाउंट सर्विस मिली। तब भी मैंने सोचा कि फिर मैं आईएएस के लिए प्रयास करुंगा। तीसरे प्रयास में मेरा प्रारंभिक परीक्षा में भी नहीं हुआ, जो कि मेरे लिए एक ‘लो प्वाइंट’ था। तब मैंने सोचा कि मैं सर्विस में होने के बावजूद मेरा प्रिलिमस तक नहीं हुआ, क्या मैं कोई गलती तो नहीं कर रहा हूं। तब मैंने अपने अंदर की कमी को जाना और मैंने उस पर काम किया और आखिरकार मुझे सफलता मिल ही गई।

जब शुभम से उनके वर्तमान सिविल सेवा परीक्षा पैटर्न में इंटरनेट की भूमिका के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट का युग है। इंटरनेट का आप दो तरह से उपयोग कर सकते हैं। एक गूगल वेबसाइट के माध्यम से दूसरा फेसबुक, व्हाट्सअप या सोशल मीडिया के माध्यम से, मैंने किसी भी सोशल मीडिया या बेवसाइट से दूरी नहीं बनाई। बल्कि हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे लिए क्या उपयोगी है, उसी अनुरुप उनका सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। शुभम ने बताया कि ये मुकाम हासिल करके मुझे बहुत खुशी मिली है और इसका श्रेय में अपने माता-पिता, परिवार और दोस्तों को देना चाहूंगा।

देखें… शुभम गुप्ता की जुबानी उनकी सफलता की कहानी

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