यूपी में सपा-बसपा 38-38 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, कभी 23 साल पहले हुए ‘गेस्ट हाउस कांड’ की वजह से बने थे दुश्मन

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लोकसभा चुनाव में मोदी की बीजेपी को मात देने के लिए दो कट्टर विरोधी मानी जाने वाली पार्टियां अब एक साथ होती नजर आ रही हैं। किसी ने सही कहा है कि राजनीति अवसरों का खेल है, यहां कोई हमेशा के लिए दोस्त या दुश्मन नहीं होता। कल तक जो एक दूसरे की शक्ल नहीं देखना चाहते थे आज वो अपनी 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक साथ मंच पर आने के लिए तैयार हैं। शनिवार को लखनऊ में ऐसी ही एक ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिली, जहां समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने सीटों के बंटवारे भी कर लिया है। दोनों ही पार्टियां 38-38 सीटों पर यूपी लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

लेकिन इस ऐतिहासिक तस्वीर के सामने आने से पहले जरा उस इतिहास पर भी गौर कर ले जिसके लिए सपा और बसपा के बीच लंबी दूरियां आ गई थी। दरअसल, बात उस समय की है जब 1993 में राज्य में बाबरी विध्वंस होने के बाद राष्ट्रपति शासन चल रहा था। मंदिर-मस्जिद का विवाद होने की वजह से ध्रुवीकरण का आलम था। यह बात सभी राजनीति पार्टियों को पता थी और इसी वजह से दो विरोधी पार्टी रही सपा-बसपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ। इसके बाद गठबंधन की सरकार 4 दिसंबर 1993 को सत्ता में बैठी लेकिन 2 जून 1995 को बसपा ने खुद को इस सरकार से अलग कर लिया और अपना समर्थन भी वापस लेने का ऐलान कर दिया। बसपा के समर्थन वापस लेने के बाद मुलायम सिंह यादव की सरकार अल्पमत में आ गई। वहीं इसके बाद 3 जून 1995 को मायावती ने बीजेपी के साथ मिलकर सत्ता संभाल ली।

लेकिन इस पूरे वाक्या में 2 जून को जो हुआ वो पहले कभी प्रदेश की राजनीति में देखने को मिला। उस दिन एक गुस्साई भीड़ बसपा सुप्रीमो मायावती को सबक सिखाने के चक्कर में पूरी तरह से उन पर हमला करने को उतारु हो गई थी। हालांकि इस दिन को लेकर कई तरह की बातें होती लेकिन आज भी ये एक सवाल ही बना हुआ है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के गेस्ट हाउस में क्या हुआ था ?

क्या हुआ था उस दिन

जब मायावती ने गठबंधन से किनारा किया तो मुलायम की सरकार संकट में आ गई और सरकार को बचाने के लिए हर संभव कोशिशें की जाने लगी। हालांकि जब बात नहीं बनी तो सपा के नाराज कार्यकर्ता और विधायक ने लखनऊ के मीराबाई मार्ग पर स्थित गेस्टहाउस पहुंच गए, मायावती यहां रुकी हुई थी। कहा जाता है कि उस दिन बीएसपी सुप्रीमों के साथ कुछ गुंडों ने बदसलूकी की थी। बसपा के मुताबिक सपा के लोगों ने उनके साथ धक्का मुक्की की और मुकदमें में लिखा गया था कि उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई थी। इसी पूरे मामले को गेस्ट हाउस कांड कहा जाता है।

अब तस्वीर है कुछ और

हालांकि 23 साल पुरानी इस पूरी घटना के बाद आज तस्वीर अलग है। अखिलेश यादव और मायावती के साथ आने की खबरें काफी समय से ही आ रही हैं। इस गठबंधन का फॉर्मूला गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में हासिल जीत के बाद निकला है। जहां बीजेपी की भारी जीत के बाद भी उसे चित्त कर दिया गया। दोनों ही पार्टी ने एक दूसरे को इस जीत की बधाई दी थी। हालांकि गेस्ट हाउस कांड की बात करें तो इस पर मायावती ने खुद अखिलेश यादव का बचाव किया है, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा था कि उस दौरान अखिलेश राजनीति में नहीं आए थे।

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