पुलवामा आतंकी हमले में मारे गए जवानों को नहीं मिलेगा शहीद का दर्जा, जानिए वजह…

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पुलवामा आतंकी हमले में मारे गए जवानों को सभी शहीद कह रहे हैं। हम भी कह रहे हैं, आप भी कह रहे हैं, देश भी कह रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि पुलवामा हमले में मारे गए जवानों को शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा। जी हां, सरकारी दस्तावेजों में इन जवानों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाएगा। आज हम आपको बताएंगे कि क्या होता है शहीद का दर्जा और किसको मिलता है शहीद का दर्जा।

क्या होता है शहीद का दर्जा?


आपको बता दें कि नौसेना, थलसेना और वायुसेना के जवान अगर ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं तो, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाता है। नौसेना, थलसेना और वायुसेना रक्षा मंत्रालय के तहत काम करती है। शहीद का दर्जा मिलने वाले परिवारों को पेंशन, चिकित्सा उपचार, कैंटीन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। साथ ही शहीद के परिजनों को राज्य सरकार नौकरी में कोटा देती है और शहीद के बच्चों के लिए शिक्षण संस्थानों में आरक्षित साटें होती हैं

किसको नहीं मिलता शहीद का दर्जा…


पैरामिलिट्री फोर्सेज जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी या किसी भी पैरामिलिट्री फोर्स के जवान अगर ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं। तो, उनको शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। आपको बता दें कि सेना पर देश के बाहरी हिस्सों की जिम्मेदारी होती है। तो वहीं, सीआरपीएफ या पैरामिलिट्री फोर्से को देश की आतंरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है। अगर पैरामिलिट्री का जवान किसी भी आतंकी या नक्सली हमले में मारा जाता है तो उसकी सिर्फ मौत होती है उसे शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता और ना ही पैरामिलिट्री जवानों को पेंशन की सुविधा मिलती है। पैरामिलिट्री गृह मंत्रालय के तहत काम करता है।

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