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क्या जे पी बिल्डर्स को बचा रही है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ?

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अभी 10 अगस्त को देश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का दिवालिया हो गया था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल(एनसीएलटी) के इलाहाबाद ब्रांच ने आईडीबीआई बैंक की रिपोर्ट को देखते हुए सुनवाई करके जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया कंपनी घोषित कर दिया था। जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर का दिवालिया घोषित होने के बाद की कार्रवाई और उसकी जमिनों का मूल्य के लिए एनसीएलटी 7 अकाउंटिंग कंपनियों में से किसी एक को यह जिम्मेदारी दी थी।

 

एनसीएलटी ने आदेश दिया था कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सस्पेंड रहेंगे। इसके अलावा एनसीएलटी एक अधिकारी भी नियुक्त करेगी, जो 270 दिनों के अंदर जेपी के फाइनेंस की पूरी जांच करेगा।और 7 अकाउंटिंग कंपनियों में से ही किसी एक अधिकारी को चुना जाएगा। और यह भी बताया गया था कि इस कंपनी पर 8 हजार 365 करोड़ रुपए का कर्ज था। इतना ही नही उन्हें 270 दिनों का समय मिला था और कहा गया ता कि अगर इन 270 दिनों में उन्होंने अपनी हालत सुधार दी तो ठीक होगा, और अगर नहीं सुधार पाए तो कंपनी की सारी प्रॉपर्टी की बोली लग सकती है।

 

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जेपी बिल्डर के पूरे दिल्ली एनसीआर में कुल 32 हजार फ्लैट्स हैं। और इसका पूरा असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर होगा, जिन्होंने इन 32 हजार फ्लैट्स खरीदने के लिए पहले ही पैसे लगा दिये थे। जेपी के दिवालिया घोषित होने के बाद से कंपनी के साथ-साथ घर खरीदने वालो को भी बहुत भारी दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है जैसे यूपी की योगी सरकार जेपी को बचाने की कोशिश कर रही है। सेंटर का रीयल एस्टेट रेगुलेटरी बिल स्ट्रीकट था लेकिन योगी सरकार के बदलाव के कारण अब वो रेगुलेटरी बिल जेपी के फेवर मे आ गया है। उन्होने उसमे इतने बदलाव कर दिए कि अब जेपी बिल्डर्स के बचने की संभावना है।

 

नोएडा के बिल्डर्स ने एक प्रोजेक्ट का पैसा दुसरे पर लगा दिया है जिससे 3 लाख लोग परेशान है जिनका पैसा यहां अटका हुआ है। वैसे तो योगी सरकार जब बनी थी तब उन्होने हजारो वादे करे थे कि उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाएंगे और नोएडा के बिल्डर्स पर सख्त कार्रवाही की जाएगी लेकिन सत्ता मे आने के बाद योगी के वादे और योगी की सरकार दोनो कही खो से गए है। हालात इतने ज्यादा बुरे हो गए है कि बिल्डर्स को कंप्लीशन सर्टिफीकेट मिलता है जिसके बाद ही वह अपना फ्लैट किसी को बेच सकते है पर हालात इतने बुरे है कि बिने सर्टिफीकेट ही रजिस्ट्रेशन हो रहे है और प्लैट बेचे जा रहे है। किसी बिल्डर पर 12 करोड किसी पर 10 करोड और एक यूनाइटेक बिल्डर पर 800 करोड से ज्यादा का उधार है। और सरकार का कभी भी दिवालिया घोषित हो सकता है।

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