मुश्किल में BJP के ‘शाह’, US की मानवाधिकार की रिपोर्ट में हुआ नाम दर्ज

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देश में चुनावी माहौल है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। वैसे-वैसे बीजेपी की मुश्किलें भी कम होने का नाम नहीं ले रहीं। कभी बीजेपी के नेता ही अपनी पार्टी से नाराज़ दिखाई देते हैं। तो कभी विपक्षी पार्टियों की एकजुटता। लेकिन, इस बार मामला कुछ अलग ही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की। बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर दिए बयान पर अमित शाह घिर गए हैं।

बता दें कि मानवाधिकार पर आधारित अमेरिकी विदेश विभाग की 2018 की रिपोर्ट में अमित शाह का भी नाम है। गौरतलब है कि बीते साल सितंबर में राजस्थान के सवाई माधोपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को दीमक करार दिया था। अमित शाह ने कहा कि यह दीमक हमारे चुनाव व्यवस्था को खाए जा रहा था, लेकिन हमने राष्ट्रीय नागरिक पंजी के जरिए 40 लाख घुसपैठियों को पहचानने का काम किया है।

जानकारी के मुताबिक, भारत में ये पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हो रही है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की ड्राफ्ट सूची 30 जुलाई को प्रकाशित की गई थी। जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे। इस मसौदे में 40,70,707 लोगों के नाम नहीं थे। 1985 में राजीव गांधी की सरकार ने ऐलान किया था कि 24 मार्च 1971 के बाद कोई भी उचित दस्तावेज के बिना असम में आया तो उसको विदेशी घोषित कर दिया जाएगा।

बता दें कि 40,70,707 लोगों को अंतिम मसौदा सूची से बाहर रखने के कारण इनकी स्थिति पर अनिश्चितता पैदा हो गई। जिनमें से तो कोई ऐसे थे जिनके परिवार की कई पीढ़ियां राज्य में रह रही थीं। इन लोगों को भारतीय नागरिकों की अंतिम सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए अपील की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया था कि 2019 के आम चुनावों के बाद बीजेपी एक बार फिर सत्ता में आएगी और एक-एक घुसपैठियों को चुन-चुन कर मतदाता सूची से बाहर निकालेगी। अमित शाह ने आगे कहा कि पूर्व की यूपीए की सरकार को देश की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं थी।

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