हमेशा आंखों में आंखें डालकर बात करने से क्यों कतराते हैं पीएम मोदी, मनोविज्ञानियों ने बताई यह वजहें…

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दुनिया में ऐसी कोई चीज़ नहीं है। जो व्यक्ति का चेहरा देखकर बता सके कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। लेकिन बदलते समय के साथ विज्ञान ने काफी तरक्की की है। मनोविज्ञान ने तमाम इस तरीके खोज निकाले हैं। जिनसे यह पढ़ा जा सकता है कि सामने वाला झूठ बोल रहा है या सच।

राजनीति में नेताओं का झूठ बोलना कोई नई बात नहीं है। नवजीवन ने कुछ मनोविज्ञानियों से बात करके प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश की। ताकि लोगों को उनकी शख्सियत की सच्चाई पता चल सके। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने इन मनोविज्ञानियों में से कभी किसी से मुलाकात नहीं की। लेकिन उनके भाषणों, टीवी इंटरव्यूज के वीडियो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं, इसलिए उनके व्यक्तित्व को समझना आसान है।

मनोविज्ञानिक मानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनिंदा झूठ बोलते हैं, ऐसे झूठ जिन्हें आप तुरंत नहीं पकड़ सकते। उनका व्यक्तित्व सनक भरा (कंट्रोल फ्रीक पर्सनैलिटी) है, मतलब, हर चीज पर अपना नियंत्रण चाहते हैं। वह इमोशनल कोशेंट हैं, मतलब, भावुक बातें कहकर अपने लिए संवेदना जगा लेते हैं, लेकिन आंखों में आंखें डालकर बात करने से बचते हैं।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर अरविंद मिश्र का कहना है कि यह बात आम जानकारी में है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने बारे में दावे करते हुए गलत आंकड़े और तथ्य प्रस्तुत करते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में कहें, तो झूठ बोलने वाला व्यक्ति मूल मुद्दों से आपका ध्यान भटकाता है। वह ऐसी शब्दावली में बात करता है, जो सामने वाले को आकर्षित तो करती है लेकिन उसमें तथ्य कुछ नहीं होते।

प्रो. मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अच्छे वक्ता हैं। वह विपक्ष को भी अपने एजेंडे पर चला रहे हैं। विपक्ष भी इनके जाल में फंस जाता है। हमारे जैसे विविधता वाले देश में अवाम का भी अलग-अलग स्तर होता है। नरेंद्र मोदी उनके सामने कुछ भी बोल देते हैं और लोग उन पर विश्वास करते हैं। इस तरह की शख्सियत की खास बात होती है अतिआत्मविश्वासी होना और मोदी में गजब का आत्मविश्वास है। वह आम तौर पर चुनिंदा झूठ बोलते हैं जिन्हें तत्काल नहीं पकड़ा जा सकता।

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